Wednesday, 22 December 2021

MAHATMA GANDHI

Mahatma Gandhi was born on 2nd October 1869 at Porbander. Mohandas Karamchand Gandhi was the full name of "Bapu". We all indians call him by a loving word "BAPU". 
                                  His father name was Karamchand Gandhi. Putli bayi was his mother. The father of Mahatma Gandhi,"Karamchand Gandhi" was served as diwan at Rajkot and Porbander.

Wednesday, 6 May 2020

महामारी व मीडिया

महामारी व मिडिया

लोकतंत्र की चौथी स्तंभ मिडिया जो निम्न तीन पंक्तियों पर कार्य करती है।

   1. देश-दूनिया में हो रही घटनाओं से अवगत कराना
    2. लोगों में जागरूकता फैलाना
    3. मनोरंजन

  आज हमारी मिडिया अपनी कर्तव्यों का बखुबी पालन कर रही है । महामारी के इस दौर में जब संसार की एक-तिहाई जनसंख्या अपने घरों में कैद हो गई है तब भी हमारे जांबाज रिपोर्टर्स खबर के तह तक जाकर हमें सच्चाई से अवगत करा रहे हैं,ताकि हम में से किसी के साथ कोई भेदभाव न होने पाए।
                                  इस वैश्विक महामारी के बीच मिडिया के महत्व को समझने के लिए गौर करते हैं जहानाबाद के एक घटना पर,

खबर है बिहार के जहानाबाद जिले के प्रखंड मखदुमपुर से जहाँ बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्णानंदन वर्मा के निजी सहायक पींटू यादव ने अपने नए मकान पर 15/04/2020 को एक मछली पार्टी का आयोजन किया था जिसमें करीब सौ लोगों के मौजूद होने का दावा किया जा रहा है । दरअसल इसी दिन सुबह में पींटू यादव ने अपने सहयोगीयों के साथ इलाके में राहत सामग्री का वितरण किया जिसमें शामिल होने के लिए समाजसेवक व इलाके के नेता भी आए थे। जिनके स्वागत में मछली पार्टी का आयोजन किया गया था। जब मामला एक निजी मिडिया हाऊस तक पहुँची तब संबंधित लोगों पर लॉकडाऊन व सोशल डिस्टेंशिंग की धज्जियाँ उड़ाने को लेकर कार्यवाही की गई। पींटू यादव को भी नौकरी से निकाल दिया गया। 

तमाम अच्छाईयों के बीच हमारी मिडिया के भी कुछ नकारात्मक छवि हैं । कभी-कभी जल्दबाजी में वे अपनी विचार को कुछ खतरनाक शब्दों के साथ रख जाते हैं जो कुछ जर्नलिस्टों के कारण पूरे भारतीय मिडिया को कटघरे में खड़े कर देती है। 
  जर्नलिज्म के क्षेत्र में सबसे ऊँची "जोसेफ पुलित्जर पुरस्कार" है । परन्तु आजतक यह अपने देश के किसी प्रिन्ट मिडिया या इलेक्ट्रॉनिक मिडिया से जुड़े लोग को नहीं मिल सका है। सन् 1917 में आरंभ हुई यह पुरस्कार सर्वप्रथम अपने देश में 1937 में आयी। गोबिन्द बिहारी लाल जो एक अमेरिकन इंडियन थे 1937 में इन्हें विज्ञान में लेखन के लिए इन्हें जोसेफ पुलित्जर पुरस्कार से नवाजा गया । दूसरी पुरस्कार लंबे अरसे बाद सन् 2000 में छोटी कहानियों के संग्रह के लिए झुंपा लहिरी को दिया गया ।
                   शायद इसका सबसे बड़ा कारण है,खबर के साथ अपनी विचार को प्रकट करना जबकी पश्चिमी मिडिया ऐसा नहीं करती । मेरी भी यही मत है मिडिया को खबर दिखानी चाहिए मत हम खुद तय कर लेंगे।
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Friday, 6 December 2019

आपकी आकांक्षाओं से आपका भविष्य संवरता है Your future depends on your gratitude

देश को सशक्त बनाने में निर्भिक पत्रकारिता का बड़ा महत्व है। इसके द्वारा लोगों को पूरे देश में हो रही घटनाओं की न सिर्फ जानकारी दी जाती है बल्की उन घटनाओं के प्रति जागरूक भी किया जाता है । पत्रकारिता का क्षेत्र बड़ा ही विशाल होता है । यह आम जन की आवाज होती है। सत्ताधारी सरकार या विपक्ष दोनों की उचित,अनुचित दिखलाना, जलवायू परिवर्तन आदी बहुत सारी आम जन की मुद्दों पर राय रखना  पत्रकार लोगों का परम् कर्तव्य होता है ।
                 एक डरा हुआ पत्रकार एक मरा हुआ नागरिक पैदा करता है। मैं एक निर्भिक,राष्ट्रवादी,और उससे भी अधिक सत्यवादी पत्रकार बनना चाहता हूँ ताकि देशवासियों को सच से अवगत करा सकूँ और उन्हें देश और दूनिया के समस्याओं के हल ढुँढने के लिए प्रेरित कर सकूँ। लोगों को जबतक सच मालुम नहीं होगी तब तक वे सरकार से प्रश्न नहीं करेंगे । अपने देश में पत्रकारिता के सर्वोत्तम उदाहरण राजा राम मोहन राय हैं । उन्होंने न सिर्फ लोगों को सच से अवगत कराया बल्कि बाल विवाह,सती प्रथा जैसे जहरीले काँटों को इस देश के समाज से निकालने का काम किया है।
हमारे आज के 21वीं शताब्दी में जब पूरी दुनिया की जन समुदाय अपनी - अपनी देश को आगे बढ़ाने में लगी हुई हैं, तब भी हमारी देश की एक विशाल जन समुदाय जातिवाद,अम्बेडकरवाद,गांधीवाद,
गोडसेवाद,परिवारवाद,भाषावाद और न जाने कितने तरह के कुरीतियों में संलग्न हैं । और हमारे माननिय,सम्माननिय लोग इन्हीं मुद्दों को जीवित रखकर अपने लिए वोटबैंक इकट्ठा कर लेते हैं । ईमानदार उम्मिदवार चूँकि चापलूसी,लोगों के साथ धोखा नहीं कर सकता इसलिए वो चुनाव हार जाते हैं । आज 21 वीं शताब्दी में भी अपने देश के एक विशाल जनसमुदाय के पास अपनी कोई विचार या मत नहीं होती है,इन्हें पैसों के बल पर या दबाव बनाकर वोट लिया जा सकता है ।
                      मैं चाहता हूँ की अपने देश के सभी लोगों की अपनी खुद की विचार हो, न कि वो विचार पारिवारिक या जातिवाद आदी बुराईयों से संलग्न हो। जबतक प्रत्येक लोग अपने हक, देश के विकास में उनकी भागीदारी के बारे में नहीं जानेंगे किसी भी देश की विकास संभव नहीं है । मैं एक सच्चा पत्रकार बन लोगों को "भारतवर्ष के विकास में उनकी भागीदारी" को समझाने का काम करूँगा यदी नहीं भी बन पाया तो अपने आसपास के लोगों को जागरूक करता हूँ और करता रहूँगा।

Monday, 2 September 2019

विश्व खुशहाली रिपोर्ट - 2018

विश्व खुशहाली रिपोर्ट - 2018

इस सूची में प्रथम पाँच स्थान पर आनेवाले खुशहाल देश हैं -
1. फिनलैंड   2. नार्वे  3. डेनमार्क  4. आईलैंड  5. स्विट्जरलैंड।

इस सूचि में भारत 133 वें स्थान पर है जबकि गत वर्ष 2017 में भारत इस सूची में 122 वें स्थान पर था।

भारत के पड़ोसी देशों का रैंक है - पाकिस्तान(75 वाँ), भूटान(97 वाँ), नेपाल(101 वाँ),बांग्लादेश(115 वाँ) व श्रीलंका (116 वाँ)

विकसित देशों का रैंक - जर्मनी(15 वाँ), अमेरिका(18 वाँ), यू.के.(19 वाँ), फ्रांस(23वाँ), सिंगापुर(34 वाँ), जापान(54 वाँ)

नेहरू जी हाजिर हों !

Source:UNSDN

You can search this on Google also in Lucent page no.127 in 2019 edition.

मोदी जी!

मोदी जी !

आप फेसबुक के पेज 'भारत के मन की बात' पर लोगों के राय लेने के लिए जो प्रचार करते हैं उसमें एक प्रचार पर ₹ 7,700 खर्च करते हैं ।

जबकी किसान ₹ 960 प्रतिदिन के बोझ को सहन नहीं कर पाता और वह आत्महत्या करने को विवश होता है।

एक बार सोनिया.....

एक बार सोनिया जी राजस्थान के भरतपूर में चितौड़ राजा की जयकारी और चितौड़ में भरतपूर के राजा की जयकारी बुलवा दी
(पर्चा बदल गई थी)

     तभी वहाँ बैठे अधिकारी ने बताया मैडम ए तो गड़बड़ हो गई आपने भरतपूर के राजा की जय चितौड़ में बुला दी और चितौड़ के राजा की जय भरतपूर में बुला दी

वो बोलती हैं - शट् अप मैं जब ईटली से आकर यहाँ शासन कर सकती हूँ तो यह 20 - 25 कि०मी० चल कर नहीं आ सकता ।



Friday, 16 August 2019

All wants publicity



लोग स्वार्थ में इस कदर स्वयं को झोंक चुके हैं कि उन्हें लोगों के खुन पसीने से कमाए हुए चन्द पैसों का भुगतान करने में भी आफत आ रही होती है।

       इससे भी ज्यादा क्रुरता तो मुझे तब नजर आती है जब उन्हें FB पर किसानों की दर्द की गाथा सुनाते हुए देखता हूँ ।
     
All wants publicity,
No one wants to do for public.



Saturday, 8 June 2019

Saturday, 2 June 2018


What  will  in  our   future   in   upcoming  years   watch  this video: 

Thursday, 31 May 2018

If you want to  start a profitable Business then your solution is here.
           Today I'm going to  tell  about  paper cup  Business. Yes, you  heared  right  now  you  can be a company  owner of  paper cup manufacturer company. 
      In  this  business  you  need  3000$. For  purchase  the  paper  cup manufacturer  machine.  It will be get  you  at https://m.alibaba.com in minimum price. Raw material is also available here. Here is video, you can watch this video that ,how does this machine work . This video will help you to know about this business Idea. 
                    THANKS



Watch carefully these picture for Five  second:


Wednesday, 30 May 2018

श्रीरामनरेश   त्रिपाठी   का   जन्म संवत्   1946   में   उतर  प्रदेश  के जौनपुर    जिले   में   हुआ था। खड़ी बोली    के कवियों    में आपका महत्वपूर्ण    स्थान था।  आप हिन्दी के बहुत    पुराने कवि हैं।  आपके काव्य में भाषा   का सौन्दर्य और शैली की सरलता   रहती है। आप राष्ट्रियता   और    मानवता के पुजारी थे।   राष्ट्रिय   आंदोलन में आप  जेल   जा चुके   थे।  राष्ट्रपिता गाँधीजी   का आप   पर अधिक प्रभाव पड़ा था।    अतः   आपके खण्डकाव्यों में    अहिंसक   क्रान्ति का संदेश   सामने आता है।त्रिपाठीजी ने    प्रबन्ध - काव्य और मुक्तक - काव्य    दोनों प्रकार के काव्य    सफलतापूर्वक लिखे हैं।इसके    अतिरिक्त    कविता के विविध     प्रकारों के     संकलन आपने    कविता - कौमुदी नाम से प्रकाशित    किये हैं।    गुजरात के राष्ट्रिय    कवि श्री     झवेरचंद मेघाणी के भाँति     त्रिपाठीजी ने भी उतर - भारतीय      'लोक - साहित्य' का     सर्वप्रथम      संकलन एवं संपादन      किया और हिन्दी की बड़ी    सेवा की।     बाल     साहित्य के आप      सिद्धस्त     लेखक थे।इस प्रकार     त्रिपाठीजी बहुमुखी प्रतिभा के साहित्यकार    माने जाते थे।    अंत तक    आप हिन्दी     साहित्य के     सेवा में लगे रहे। आपकी     प्रमुख     रचनाएँ पथिक,मिलन,स्वप्न, और कविता-     कौमुदी है।


https://https://youtu.be/QSgEJMNrlu8
Dance is the best way to reach at  highest  Goal  and  Success  There  is  a short  video  of   Dance  On Bumm diggy  diggy bumm-bumm
https://youtu.be/qk3R4rltEM

Thursday, 12 April 2018

Bussiness IDEA

If you want to earn a lot of money  by simple invest then you should read this article carefully. It is a type of a business.It's name is Pay and use Cyber Cafe.You have to settlement these things -1.A room ( generalally found in about ₹1,000pm)  2.Two computer system(in beginning )
       Advertise about your Pay and use Cyber Cafe in your town by school boy, Whatsapp and fb.
           When customer came then you have to get ₹10 and give him your computer for 15 minutes.He can operate anything in your computer in his 15 min.
       Try to advertise your business in school boy.Because he have a computer book in his school and he need a computer at his home but a few parents can gift a computer to his children. You will do for him by open your Pay and use Cyber Cafe.

Saturday, 10 March 2018

Isaac Newton

Isaac Newton was born on 1642 in England at wulstharpe  incidentally in this year Galileo was died. In school life his Awesome Mathematical talent and Mechanical interest had been hidden by other people. In 1662 for the study of pre bachelor he went to Cambridge. In 1669, due
to spread epidemic Plague university had to close and newton came back at his motherland.

Wednesday, 7 March 2018

Alexander Graham Bell

Alexander Graham Bell(March 3,1847,Edinburgh, Scotland-August 2,1922,Baddek, Nova Scotia) invented the telephone (with Thomas Watson) in 1876. Bell also improved Thomas Edison's phonograph. Bell invented the multiple telegraph (1875),the hydroairplane, the photo sensitive selenium cell (the photophone, a wireless phone, developed with Sumner Tainter ) and new techniques for teaching the deaf to speak. In 1882, Bell and his father - in - law,Gardiner Hubbard,bought  and re-organized the journal "Science." Bell,Hubbard and others founded the National Geographic Society in 1888; Bell was the President of the National Geographic Society from 1898 to 1903.

Sunday, 4 March 2018

Galileo Galilei

Galileo Galilei was born on 1564 at Pisa. He gave the concept of acceleration. His invention of astronomy is very revolutionary. He made a visionary by himself (which was discovered in Holland) And used it in many interesting discover.Such as mountain and Trough on the surface of moon, Black spots on the sun, satellite of Jupiter and angle of Venus.Galileo Galilei is the father of modern science.

Sunday, 25 February 2018

Sir C.V Raman

Chandrasekhar venctaraman was born on 07 November, 1888 at thiruvanaikkal. He completed his school at  age11 year. After completing school he get graduated from Presidency college,Madras. After completing education  he took  charge in financial services of India.
         In living Kolkata, in evening time he start working according to his interest in Indian Association for Cultivation of Science which was to set up by Dr. Mahendra lal sirkar. In his interested work Vibration, variety of musical instruments, harmless waves, diffraction etc. were included.
             In 1917, he was given the post of Professor by the University of Calcutta.In the year 1924, the Royal Society of London elected him Fellow for the Society  and in 1930 his work; They are now conferred with the Nobel Prize for Raman - effect.
 -Gautam vidyarthee Pathak

ALBERT EINSTEIN

Life of Albert Einstein was 1879-1955. Einstein was born in 1879 in Germany at Ulm. Albert Einstein was one of them who were considered universally greatest as physicist yet.
 . His awesome scientific life was start from published his three revolutionary [research letter] by him in 1905.  In his first research letter he proposed perception of quantum of light(Now it is called Photon) and used this perception in describing of symptoms of "Light electric affect" which was can't be verified by lasting of Radiations of wave theorem. In his second Research letter he developed theory of Brownian motion or pedesis . Which was practically confermed after some years. This theory submitted trusted proof of Atomic depiction of matter
-Gautam vidyarthee pathak

Thursday, 8 February 2018

Shoes

Shoes is our reputation.It gives us high respect  anyway  anytime.
                        Suppose you go to a party and you wear best clothes,wrest and your hair style is also very good but you have not wear a shoe or nice shoe then your personality can be affected.All other people look at your feet . When he saw that you have not wear a nice shoe then they will look at your face.It is really very bad feeling for you that time.
                                      In modern time demand of shoes increasing day - by - day. There are many types of shoes company in the market. But I prefer campus. Campus makes nice shoes. Base of campus shoes is softly so his shoes go longer than others in same ranges.

Tuesday, 6 February 2018

Dr.A.P.J abdul kalam

He was born in tamilnadu at Rameshwaram.His Father's name is Jainulabdin and his mother's name is Aashanka.He likes too much sweets which was made by his mother.
          He get his first prize in 26 january 1986 by the president of india Nilam sanjeev reddy.After success of   PSLV-3. The first prize name is 'Padmabhooshan'.When time he got the Padmabhooshan that time about of his friends who work with him on the same project was dissatisfied with him. because they think that he is not able to got it.
                         When Abul kalam Azad went to NASA for increase his ability.He saw a painting on a wall . Which was  related to Aeronautics.A man was firing many rockets against british army .Who was not a fair whereas he was unfair.After some time he knows that person .That person is Tipu Sultan.He was very happy because a indian ability is billowing in America.
                      -Wings of fire

Monday, 5 February 2018

Gaura(गौरा)

 गौरा मेरी बहिन के घर पली हुई गाय की वयः सन्धि तक पहुँची हुई बछिया थी। उसे इतने स्नेह और दुलार से पाला गया था कि यह अन्य गोवतसावों से कुछ विशिष्ट हो गयी थी।
                                    बहिन ने एक दिन कहा, तुम जो इतने पशु- पछी पाला करती हो -एक गाय क्यों नहीं पाल लेतीं,जिसका कुछ उपयोग हो। वास्तव में मेरी छोटी बहिन श्यामा अपनी लौकिक बुद्धि में मुझसे बहुत बड़ी हैं और बचपन से उनकी कर्मनिष्ठा तथा व्यवहारकुशलता की बहुत प्रशंसा होती रही है,विशेषतः मेरी तुलना में।
यदि वे आत्मविश्वास के साथ कुछ कहती हैं तो उनका विचार संक्रामक रोग के समान सुननेवाले को तत्काल प्रभावित करता है आश्चर्य नहीं,यदी उस दिन उनके उपयोगितावादी संबंधी भाषण ने मुझे इतना अधिक प्रभावित किया कि तत्काल उस सुझाव का कार्यान्वयन आवश्यक हो गया।
                  वैसे खाद्य की किसी भी समस्या के समाधान के लिए पशु-पक्षी पालना मुझे कभी नहीं रुचा। बकरी,कुक्कुट,मछली आदि पालने के मूल उद्देश्य का ध्यान आते ही मेरा मन विद्रोह करने लगता है। पर उस दिन मैंने ध्यानपूर्वक गौरा को देखा। पुष्ट लचीले पैर,भरे पुट्ठे,चिकनी भरी हुई पीठ,लम्बी सुडौल गर्दन,निकलती हुए छोटे-छोटे सींग,भीतर की लालिमा की झलक देते हुए कमल की दो अधखुली पंखुड़ियों जैसे कान,लम्बी और अन्तिम छोर पर काले सघन चामर का स्मरण दिलानेवाली पूँछ,सब कुछ सांचे में ढला हुआ सा था।गाय को मानो इटैलियन मार्बल में तराशकर उस पर ओप दी गई हो।
     स्वस्थ पशु के रोमों की सफेदी में एक विशेष चमक होती है। गौरा की अल उज्जवलता देखकर ऐसा लगा,मानो उसके रोमों पर अभ्रक का चूर्ण मल दिया गया हो,जिसके कारण जिधर आलोक पड़ता था,उधर विशेष चमक उतपन्न हो जाती थी।
                               गौरा को देखते ही मेरी पालने के संबंध में दुविधा निश्चय ही बदल गई।
गाय ज॒ब मेरे बंगले पर पहुँची,तब मेरे परिचितों और परिचारकों में श्रद्धा का ज्वर - सा उमड़ आया। उसे लाल - सफेद गुलाबों की माला पहनाई गई,केशर रोली का बड़ा - सा टिका लगाया गया, घी का चौमुखा दिया जलाकर आरती उतारी गई और उसे दही - पेड़ा पिलाया गया। उसका नामकरण हुआ गौरांगिनी या गौरा। पता नहीं ,इस पूजा-अर्चना का उस पर क्या प्रभाव पड़ा,परन्तु वह बहुत प्रसन्न जान पड़ी।उसकी बड़ी चमकीली आँखों में जब आरती के दिये की लो प्रतिफलित होकर झिलमिलाने लगी,तब कई दियों का भ्रम होने लगा। जान पड़ा जैसे रात में काली दिखनेवाली  लहर पर किसी ने कई दिये प्रकाशित कर दिये हों।
            गौरा वास्तव में बहुत प्रियदर्शनी थी,विशेषतः उसकी काली बिल्लौर आँखों का तरल सौन्दर्य तो दृष्टि को बांधकर स्थिर कर देता था। चौड़े उज्जवल माथे और लम्बे सांचे में ढले हुए मुख पर आँखें बर्फ में नीले जल के कुण्डों के समान लगती थीं। उनमें एक अनोखा विश्वास का भाव रहता था । गाय के नेत्रों में हिरन के नेत्रों जैसा चकित विस्मय न होकर एक आत्मीय विश्वास ही रहता है। उस पशु को मनुष्य ही नहीं ,निर्मम मृत्यु तक प्राप्त होती है, परन्तु उसकी आँखों के विश्वास का स्थान न विस्मय ले पाता है, न आतंक।
             महात्मा गाँधी ने ' गाय करुणा की कविता है',क्यों कहा, यह उसकी आँखें देखकर ही समझ में आ सकता है ।
                                                गौरा को अलस मन्थर गति से तुलना करने योग्य कम वस्तुएँ हैं। तीव्र गति में सौन्दर्य है;परन्तु वह मन्थर गति के सौन्दर्य को नहीं पाता । बाण की तीव्र गति क्षण भर के लिए दृष्टि में  चकाचौंध उत्पन्न कर सकती है ,परन्तु मन्द समीर से फूल का अपने वृन्त पर हौले - हौले हिलना दृष्टि का उत्सव है।
                   कुछ ही दिनों में वह सबसे इतनी हिलमिल गई कि अन्य पशु-पक्षी अपनी लघुता और उसकी विशालता का अन्तर भुल गए।कुत्ते - बिल्ली उसके पेट के नीचे और पैरों के बीच में खेलने लगे। वह स्थिर खड़ी रहकर और आँखें मुँदकर मानो उनके संपर्क - सुख की अनुभूति में खो जाती थी।
                हम सबको वह आवाज से नहीं पैर की आहत से भी पहचानने लगी थी। समय का इतना अधिक बोध उसे हो गया था कि मोटर के फाटक में प्रवेश करते ही बां - बां की ध्वनी से हमें पुकारने लगती। चाय नाश्ता तथा भोजन के समय से भी वह इतनी परिचित थी कि थोड़ी देर कुछ पाने की प्रतीक्षा करने के उपरान्त रंभा - रंभाकर घर सिर पर उठा लेती थी।
     उसका साहचर्यजनित लगाव,मानवीय स्नेह के समान ही निकटता चाहता था। निकट जाने पर सहलाने के लिए गर्दन बढ़ा देती,हाथ फेरने पर अपना मुख आश्वस्त भाव से कंधे पर रख कर आँखें मूंद लेती। जब उससे दूर जाने लगते,तब गर्दन घुमा - घुमाकर देखती रहती।आवश्यकता के लिए उसके पास ध्वनि थी,परन्तु उल्लास,दुः ख,उदासीनता,आकुलता आदी की अनेक छाया छवियां उसकी बड़ी और काली आँखों में तैरा करती थी।
          एक वर्ष के उपरान्त गौरा एक तुष्ट सुन्दर वत्स की माता बनी। वत्स अपने लाल रंग के कारण गेरू के पुतला जैसा जान पड़ता था। उसके माथे पर पान के आकार का श्वेत तिलक और चारों पैरों में खुरों के ऊपर सफेद वलय ऐसे लगते थे,मानो गेरू की बनी वत्समूर्ति को चाँदी के आभूषणों से अलंकृत कर दिया हो। बछड़े का नाम रखा गया लालमणी,परन्तु उसे सब लालू के नाम से पुकारने लगे। माता - पुत्र दोनों निकट रहने पर हिमराशि और जलते अंगारे का स्मरण कराते थे। अब हमारे घर में मानों दूग्ध - महोत्सव आरंभ हुआ। गौरा प्रातः-सायं बारह सेर के लगभग दूध देती थी, अतः लालमणि के लिए कई सेर छोड़ देने पर भी इतना अधिक शेष रहता था कि आसपास के बालगोपाल से लेकर कुत्ते-बिल्लियों ने तो एक अद्भुत दृश्य उपस्थित कर दिया था। दुग्ध दोहन के समय वे सब गौरा के सामने पंक्ति में बैठ जाते और महादेव उनके आगे उनके  खाने के लिए निश्चत बर्तन रख देता। किसी विशेष आयोजन पर आमंत्रित अतिथियों के सामने वे परम शिष्टता का परिचय देते हुए प्रतीक्षा करते रहते। फिर नाप - नापकर सबके पात्रों में दूध डाल दिया जाता,जिसे पीने के बाद वे एक बार फिर अपने-अपने स्वर में कृतज्ञता ज्ञापन-सा करते हुए गौरा के चारों ओर उछलने कूदने लगते। जब तक वेसब चले न जाते,गौरा प्रसन्न दृष्टि से उन्हें देखती रहती। जिस दिन उनके आने में विलम्ब होता वह रंभा-रंभाकर मानो उन्हें पुकारने लगती।
              पर अब दुग्ध दोहन की समस्या कोई स्थान समाधान चाहती थी। नौकरों में नागरिक तो दुहना जानते ही नहीं थे और जो गांव से आए थे,वह अनभ्यास के कारण यह कार्य इतना भूल चुके थे कि घंटों लगा देते थे। गौरा कै दूध देने के पूर्व जो ग्वाला हमारे यहाँ दूध देता था, जब उसने इस काम के लिए अपनी नियुक्ति के विषय में आग्रह किया,तब हमने अपनी समस्या का समाधान पा लिया।
                                                                              दो-तीन मास के उपरान्त गौरा ने दारा-चारा खाना बहुत कम कर दिया और वह उत्तरोत्तर दुर्बल शिथिल रहने लगी। चिन्तित होकर मैंने पशु चिकित्सकों को बुलाकर दिखाया। वे कई दिन तक अनेक प्रकार के निरिक्षण-परीक्षण,एक्स-रे आदी द्वारा रोग का निदान खोजते रहे।अंत में उन्होंने निर्णय दिया कि गाय को सुई खिला दी गई है,जो उसके रक्त संचार के साथ हृदय के पास पहुँच गई है। जब सुई हृदय के पार हो जाएगी,तब रक्त संचार रुकने से उसकी मृत्यु निश्चित है।
       
          मुझे कष्ट और आश्चर्य दोनों की अनुभूति हुई। सूई खिलाने का क्या तात्पर्य हो सकता ? दाना चारा तो हम स्वयं देखभाल कर देते हैं,परन्तु संभव है,उसी में सुई चली गई हो। पर डॉक्टर के उत्तर से ज्ञात हुआ की दाने चारे के साथ गई सुई गाय के मुख में ही छिदकर रह जाती है गुड़ के बड़ी डली के भीतर रखी सुई ही गले के नीचे उतर जाती है और अन्ततः रक्त संचार में मिलकर हृदय में पहुँच सकती है।अंत में एक ऐसा निर्मम सत्य उद्घाटित हुआ;जिसकी कल्पना भी मेरे लिए संभव नहीं थी। प्रायः कुछ ग्वाले ऐसे घरों में,जहाँ उनसे अधिक दुध लिया जाता है,गाय का आना सह नहीं पाते। अवसर मिलते ही वे गुड़ में लपेटकर सुई उसे खिलाकर उसकी असमय मृत्यु निश्चित कर देते हैं। गाय के मर जाने कपर उन घरों में वे पुनः दूध देने लगते हैं। सूई की बात ज्ञात होते ही ग्वाला एक प्रकार से अन्तर्धान हो गया,अतः संदेह का विश्वास में बदल जाना स्वाभाविक था। वैसे उसकी उपस्थिति में भी कोई कानूनी प्रमाण जुटाना असंभव था।
              तब गौरा का मृत्यु से संघर्ष आरंभ हुआ,जिसकी स्मृति मात्र से आज भी मन सिहर उठता है। डॉक्टरों ने कहा,गाय को सेव का रस पिलाया जाये,तो सुई पर कैल्सियम जम जाने और उसके न चुभने की संभावना है। अतः नित्य कई-कई सेर सेब का रस निकाला जाता और नली से गौरा को पिलाया जाता। शक्ति के लिए इंजेक्शन पर इंजेक्शन दिए जाते। पशुओं के इंजेक्शन केलिए शुजे के समान बहुत लम्बी मोटी सिरिन्ज तथा बड़ी बोतल भर दवा की आवश्यकता होती है।अतः वह इंजेक्शन भी अपनेआप में 'शल्य क्रिया' जैसा यातनामय हो जाता था। पर गौरा अत्यन्त शक्ति से बाहर और भीतर,दोनों ओर की चुभन और पीड़ा सहती थी। कभी-कभी उसकी सुन्दर पर उदास आँखों के कोनों में पानी की दो बुँदें झलकने लगती थीं।
         अब वह उठ नहीं पात थी,परन्तु मेरे पास पहुँचते ही उसकी आँखों में प्रसन्नता की छाया-सी तैरने लगती थी। पास जाकर बैठने पर वह मेरे कंधे पर अपना मुख रख देती थी और अपनी खुरदरी जीभ से मेरी गर्दन चाटने लगती थी।
             लालमणी बेचारे को तो माँ की व्याधि और आसन्न मृत्यु का बोध नहीं था। उसे दूसरी गाय का दूध पिलाया जाता था,अतः अवसर मिलते ही वह गौरा के पास पहुँचकर या अपना सिर मार-मार,उसे उठाना चाहता था या खेलने के लिए उसके चारों ओर उछल-कूदकर परिक्रमा ही देता रहता।
         मैंने बहुत से जीव-जन्तु पाल रखे हैं,अतः उनमें से कुछ को समय-समय असमय विदा देने ही पड़ती है। परन्तु ऐसी मर्मव्यथा मुझे स्मरण नहीं है। I
           इतनी हृ-पुष्ट,सुन्दर,दूध-सी उज्जवल पयस्विनी गाय अपने इतने सुन्दर चंचल वत्स को छोड़कर किसी भी क्षण निर्जिव और निश्चेष्ट हो जाएगी, यह सोचकर ही आँसू आ जाते थे।
                लखनऊ कानपुर आदी नगरों से भी पशु-विशेषज्ञों को बुलाया,स्थानीय पशु-चिकित्सक दो दिन में दो-तीन बारआते रहे,परन्तु किसी ने ऐसा उपचार नहीं बताया जिससे आशा की कोई किरण मिलती। दिरुपाय मृत्यु की प्रतिक्षा का मर्म वही जानता है,जिसे किसी असाध्य और मरणासन्न रोगी के पास बैठना पड़ता हो।
    जब गौरा की सुन्दर चमकीली आँखें निष्प्रभ हो चलीं और सेब का रस भी कंठ में रुकने लगा,तब मैं अन्त का अनुमान लगा लिया। अब मेरी एक ही इच्छा थी कि मैं उसके अन्त के समय उपस्थित रह सकूँ। दिन में ही नहीं? रात में भी कई-कई बार उठकर मैं उसेदेखने जाती रही।
        अन्त में एक दिन ब्रह्ममुहुर्त में चार बजे जब मैं गौरा को देखने गई,तब जैसे ही उसने अपना मुख सदा के समान मेरे कंधे पर रखा,वैसे ही वह एकदम पत्थर जैसा भारी हो गया और मेरी बांह पर से सरकक धरती पर आ रहा। कदाचित् सुई ने हृदय को बेधकर बन्द कर दिया।
        अपने पालित जीव जन्तुओं के पार्थिव अवशेष मैं गंगा को समर्पित करती रही हूँ। गौरांगिनी को ले जाते समय मानो करुणा का समुद्रउमड़ आया,परन्तु लालमणी इसे भी खेल समझ उछलता-कुदता रहा। यदि दीर्घ-निःश्वास का शब्दों में अनुवाद हो सके,तो उसकी प्रतिध्वनि कहेगी 'आह मेरा गोपालक देश!'

Tuesday, 23 January 2018

PERSONALITY

Hi world....
As you know Personality is the very important for us. A good  personality gives more confidence against any problem.


If you have a good personality then your work will not very difficult and you can achieve your goals  easily. There are some easily steps to improve your personality:
1.So first of all,you should take care on your language. You should always speak truth and  pure language.
2.Go to the conference,school,college and meet with the people and try to affect him by own personality.
3.Always be happy and try to give happiness to other rural people.
4.Help the people : It is the best Idea to plus your personality. Help the people and try to ask what is his problem? and compare with own problem and think!

MAHATMA GANDHI

Mahatma Gandhi was born on 2nd October 1869 at Porbander. Mohandas Karamchand Gandhi was the full name of "Bapu". We all indians c...