देश को सशक्त बनाने में निर्भिक पत्रकारिता का बड़ा महत्व है। इसके द्वारा लोगों को पूरे देश में हो रही घटनाओं की न सिर्फ जानकारी दी जाती है बल्की उन घटनाओं के प्रति जागरूक भी किया जाता है । पत्रकारिता का क्षेत्र बड़ा ही विशाल होता है । यह आम जन की आवाज होती है। सत्ताधारी सरकार या विपक्ष दोनों की उचित,अनुचित दिखलाना, जलवायू परिवर्तन आदी बहुत सारी आम जन की मुद्दों पर राय रखना पत्रकार लोगों का परम् कर्तव्य होता है ।
एक डरा हुआ पत्रकार एक मरा हुआ नागरिक पैदा करता है। मैं एक निर्भिक,राष्ट्रवादी,और उससे भी अधिक सत्यवादी पत्रकार बनना चाहता हूँ ताकि देशवासियों को सच से अवगत करा सकूँ और उन्हें देश और दूनिया के समस्याओं के हल ढुँढने के लिए प्रेरित कर सकूँ। लोगों को जबतक सच मालुम नहीं होगी तब तक वे सरकार से प्रश्न नहीं करेंगे । अपने देश में पत्रकारिता के सर्वोत्तम उदाहरण राजा राम मोहन राय हैं । उन्होंने न सिर्फ लोगों को सच से अवगत कराया बल्कि बाल विवाह,सती प्रथा जैसे जहरीले काँटों को इस देश के समाज से निकालने का काम किया है।
हमारे आज के 21वीं शताब्दी में जब पूरी दुनिया की जन समुदाय अपनी - अपनी देश को आगे बढ़ाने में लगी हुई हैं, तब भी हमारी देश की एक विशाल जन समुदाय जातिवाद,अम्बेडकरवाद,गांधीवाद,
गोडसेवाद,परिवारवाद,भाषावाद और न जाने कितने तरह के कुरीतियों में संलग्न हैं । और हमारे माननिय,सम्माननिय लोग इन्हीं मुद्दों को जीवित रखकर अपने लिए वोटबैंक इकट्ठा कर लेते हैं । ईमानदार उम्मिदवार चूँकि चापलूसी,लोगों के साथ धोखा नहीं कर सकता इसलिए वो चुनाव हार जाते हैं । आज 21 वीं शताब्दी में भी अपने देश के एक विशाल जनसमुदाय के पास अपनी कोई विचार या मत नहीं होती है,इन्हें पैसों के बल पर या दबाव बनाकर वोट लिया जा सकता है ।
मैं चाहता हूँ की अपने देश के सभी लोगों की अपनी खुद की विचार हो, न कि वो विचार पारिवारिक या जातिवाद आदी बुराईयों से संलग्न हो। जबतक प्रत्येक लोग अपने हक, देश के विकास में उनकी भागीदारी के बारे में नहीं जानेंगे किसी भी देश की विकास संभव नहीं है । मैं एक सच्चा पत्रकार बन लोगों को "भारतवर्ष के विकास में उनकी भागीदारी" को समझाने का काम करूँगा यदी नहीं भी बन पाया तो अपने आसपास के लोगों को जागरूक करता हूँ और करता रहूँगा।
एक डरा हुआ पत्रकार एक मरा हुआ नागरिक पैदा करता है। मैं एक निर्भिक,राष्ट्रवादी,और उससे भी अधिक सत्यवादी पत्रकार बनना चाहता हूँ ताकि देशवासियों को सच से अवगत करा सकूँ और उन्हें देश और दूनिया के समस्याओं के हल ढुँढने के लिए प्रेरित कर सकूँ। लोगों को जबतक सच मालुम नहीं होगी तब तक वे सरकार से प्रश्न नहीं करेंगे । अपने देश में पत्रकारिता के सर्वोत्तम उदाहरण राजा राम मोहन राय हैं । उन्होंने न सिर्फ लोगों को सच से अवगत कराया बल्कि बाल विवाह,सती प्रथा जैसे जहरीले काँटों को इस देश के समाज से निकालने का काम किया है।
हमारे आज के 21वीं शताब्दी में जब पूरी दुनिया की जन समुदाय अपनी - अपनी देश को आगे बढ़ाने में लगी हुई हैं, तब भी हमारी देश की एक विशाल जन समुदाय जातिवाद,अम्बेडकरवाद,गांधीवाद,
गोडसेवाद,परिवारवाद,भाषावाद और न जाने कितने तरह के कुरीतियों में संलग्न हैं । और हमारे माननिय,सम्माननिय लोग इन्हीं मुद्दों को जीवित रखकर अपने लिए वोटबैंक इकट्ठा कर लेते हैं । ईमानदार उम्मिदवार चूँकि चापलूसी,लोगों के साथ धोखा नहीं कर सकता इसलिए वो चुनाव हार जाते हैं । आज 21 वीं शताब्दी में भी अपने देश के एक विशाल जनसमुदाय के पास अपनी कोई विचार या मत नहीं होती है,इन्हें पैसों के बल पर या दबाव बनाकर वोट लिया जा सकता है ।
मैं चाहता हूँ की अपने देश के सभी लोगों की अपनी खुद की विचार हो, न कि वो विचार पारिवारिक या जातिवाद आदी बुराईयों से संलग्न हो। जबतक प्रत्येक लोग अपने हक, देश के विकास में उनकी भागीदारी के बारे में नहीं जानेंगे किसी भी देश की विकास संभव नहीं है । मैं एक सच्चा पत्रकार बन लोगों को "भारतवर्ष के विकास में उनकी भागीदारी" को समझाने का काम करूँगा यदी नहीं भी बन पाया तो अपने आसपास के लोगों को जागरूक करता हूँ और करता रहूँगा।