महामारी व मिडिया
लोकतंत्र की चौथी स्तंभ मिडिया जो निम्न तीन पंक्तियों पर कार्य करती है।
1. देश-दूनिया में हो रही घटनाओं से अवगत कराना
2. लोगों में जागरूकता फैलाना
3. मनोरंजन
आज हमारी मिडिया अपनी कर्तव्यों का बखुबी पालन कर रही है । महामारी के इस दौर में जब संसार की एक-तिहाई जनसंख्या अपने घरों में कैद हो गई है तब भी हमारे जांबाज रिपोर्टर्स खबर के तह तक जाकर हमें सच्चाई से अवगत करा रहे हैं,ताकि हम में से किसी के साथ कोई भेदभाव न होने पाए।
इस वैश्विक महामारी के बीच मिडिया के महत्व को समझने के लिए गौर करते हैं जहानाबाद के एक घटना पर,
खबर है बिहार के जहानाबाद जिले के प्रखंड मखदुमपुर से जहाँ बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्णानंदन वर्मा के निजी सहायक पींटू यादव ने अपने नए मकान पर 15/04/2020 को एक मछली पार्टी का आयोजन किया था जिसमें करीब सौ लोगों के मौजूद होने का दावा किया जा रहा है । दरअसल इसी दिन सुबह में पींटू यादव ने अपने सहयोगीयों के साथ इलाके में राहत सामग्री का वितरण किया जिसमें शामिल होने के लिए समाजसेवक व इलाके के नेता भी आए थे। जिनके स्वागत में मछली पार्टी का आयोजन किया गया था। जब मामला एक निजी मिडिया हाऊस तक पहुँची तब संबंधित लोगों पर लॉकडाऊन व सोशल डिस्टेंशिंग की धज्जियाँ उड़ाने को लेकर कार्यवाही की गई। पींटू यादव को भी नौकरी से निकाल दिया गया।
तमाम अच्छाईयों के बीच हमारी मिडिया के भी कुछ नकारात्मक छवि हैं । कभी-कभी जल्दबाजी में वे अपनी विचार को कुछ खतरनाक शब्दों के साथ रख जाते हैं जो कुछ जर्नलिस्टों के कारण पूरे भारतीय मिडिया को कटघरे में खड़े कर देती है।
जर्नलिज्म के क्षेत्र में सबसे ऊँची "जोसेफ पुलित्जर पुरस्कार" है । परन्तु आजतक यह अपने देश के किसी प्रिन्ट मिडिया या इलेक्ट्रॉनिक मिडिया से जुड़े लोग को नहीं मिल सका है। सन् 1917 में आरंभ हुई यह पुरस्कार सर्वप्रथम अपने देश में 1937 में आयी। गोबिन्द बिहारी लाल जो एक अमेरिकन इंडियन थे 1937 में इन्हें विज्ञान में लेखन के लिए इन्हें जोसेफ पुलित्जर पुरस्कार से नवाजा गया । दूसरी पुरस्कार लंबे अरसे बाद सन् 2000 में छोटी कहानियों के संग्रह के लिए झुंपा लहिरी को दिया गया ।
शायद इसका सबसे बड़ा कारण है,खबर के साथ अपनी विचार को प्रकट करना जबकी पश्चिमी मिडिया ऐसा नहीं करती । मेरी भी यही मत है मिडिया को खबर दिखानी चाहिए मत हम खुद तय कर लेंगे।
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